मेरा सब से खुशी का दिन डेढ़ साल पहले था। मुझे याद है कि एक पूरा महिने के लिए इस दिन का इंतज़ार कर रहा था। हाई स्कूल ख़त्म करके तीन महीने हुए थे। मैंने एक परियोजना शुरू की और मैं बहुत खुश था। मैं एक महीने से कम्प्यूटर बनाने के लिए चीज़े मंग्वा रहा था। पिछले दो महीनों के लिए मैं कम्प्यूटर पार्ट्स की खोज कर रहा था और मुझे इसे करने में तीस घंटे के करीब लग गए थे।
एक-एक करके मेरी सारी चीजें मेरे घर पहुँच गयीं। उस दिन मैंने बहुत खुशी से सारे डिब्बे खोलकर हमारे बैठने का कमरा भर दिया। फिर वह दिन आ गया जब मैं कम्प्यूटर बनाना शुरू कर सकता था। मेरा दिल तो था कि मैं उस ही वक्त कम्प्यूटर बनाना शुरू कर लूँ लेकिन रात को बहुत देर हो चुकी थी और मेरी माँ ने कहा के अब कल शुरू करना। मैं अच्छा बच्चा हूँ तो मैंने अपनी माँ की बात सुनी।
अगले दिन मैं कम्प्यूटर बनाना शुरू करने लगा पर मेरे बहनोई ने कहा के वह मेरी मदद करेंगे अगर मैं उनके लिए रुक सकता था। मैंने सोचा था के अब तीन महीने के लिए इंतज़ार किया तो दो तीन घंटे और क्या फरक पड़ेगा और उन्हों ने दो बार पहले कम्प्यूटर बनाया था तो उनका इंतज़ार करने में मेरा लाभ था। वे शाम तक नहीं आये। उनके आते ही हम दोनों ने कम्प्यूटर बनाना शुरू कर दिया। कम्प्यूटर बनाने के लिए डेढ़ दो घंटे लगे थे। फिर हमने कम्प्यूटर चलाने की कोशिश की लेकिन वह ऑन नहीं होता था और मैं बहुत घबरा गया था। हम दोनों रात को ग्यारह बजे तक कम्प्यूटर ठीक करने की कोशिश करते रहे लेकिन फिर भी कम्प्यूटर नहीं चला। उदास हो के मैं अपने कमरे में सोने चला गया।
सुबह हुई तो मैं कम्प्यूटर के पास भागा और उसे चलाने की कोशिश की। वह फिर भी नहीं चला। तीन घंटे के लिए मैं अपने आप लगा रहा और फिर मैंने समस्य डुंडी। एक केबल गलत जगा में था और जब ठीक जगा में लगा दिया तो कम्प्यूटर चल पडा! मैंने घर में शोर मचाया और सब को बता दिया के मेरा कम्प्यूटर ठीक हो गया और यह मेरा सब से खुशी से भरा हुआ दिन था।
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