Sunday, March 23, 2014

शादी की रस्म


मेरी मन पसंद शादी की रस्म  मेहंदी है।  इस रस्म शादी होने कि पहले होती है।  सारे लड़कियों दुल्हन का घर जाकर मेहँदी लगाते है।  आमतौर पर, औरतों  सिरफ उनके हाथो पर मेहँदी लगाते है, लेकिन दुल्हन उसकी पैर पर भी लगाती है। मेहँदी लगाने और सूखने में बहुत समय जाता है।  इसके कारण लड़कियों नही खा पाते है और किसी को उनको खिलाना पड़ता है। मगर जब सब सुख जाता है, हम हाथ धोकर देख सकते है कि मेहँदी कितनी सुन्दर है।

भारत में, शादी बहुत बड़ी होती है और सब लोग को बुलाते है।  अमरीका में, बहुत सोचकर फेहरिस्त बनाते है आर फिर कम लोगो को बुलाते है।  जैसे अमरीका में होता है, ऐसे भारत में भी एक शादी दूसरे से बहुत अलग रहती है।  हिन्दू शादी मुसलमान से अलग है, पारसी शादी क्रिस्चियन शादी से अलग है, और उत्तरी शादियों दक्षिणी शादियों से अलग है।  यह है क्योंकि भरात एक सांस्कृतिक टेपेस्ट्री है - बहुत सारे संस्कृतियों एक-दूसरे के साथ-साथ रहते है।  जब मेरे माँ-बाप की शादी हो रही थी, उनको तीन शादी करने पड़े - एक मंदिर में, एक चर्च में, और एक नागरिक समारोह - क्योंकि मेरी माँ कैथोलिक है और मेरे बाप हिन्दू है। सरकार का  नियम है कि अगर दूल्हे और दुल्हन विभिन्न धर्मों के है तो नागरिक समारोह भी करना है।  इस लिए, मेरे माँ - बाप की शादी में बॉलीवुड फ़िल्म के गाने से भी और पोशाक बदल पड़े! 

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