राजा राम मोहन रॉय बाईस मई सत्रह सौ बहत्तर में पैदा हुए थे और उनकी मौत सताईस सप्तम्बर अठारह सौ तैंतीस में हुई थी। वह एक बहुत महशूर बंगाली शैक्षिक, धार्मिक, और सामाजिक सुधारक थे। कुछ लोग उनको आधुनिक भारत के पिता कहते हैं। वे बहुत होशियार थे। उनको संस्कृत, फ़ारसी, अंग्रेजी, अरबी, यूनानी, और लैटिन भी जानते थे। वे महशूर हुए थे क्योंकि उन्होंने बहुत मेहनत की थी कि उनका देश आधुनिक हो सके अपनी परंपरा और संस्कृति को नष्ट किये बिना। एक महान चीज़ जो उन्होंने की वह यह थी कि उन्होंने अंग्रेज़ी के स्कूल स्थापित किये ताकि हिन्दुस्तानी छात्र अंग्रेजी, विज्ञान, मेडिसिन, और टैक्नोलजी सीख सके। इस की वजह से और भारीतय लोग सरकार में हिस्सा ले सके क्योंकि उन दिनों में भारत में ब्रिटिश राज था। एक सामाजिक सुधार जो उन्होंने किया वह सती का उन्मूलन था। वे महिलाओं के अधिकार के बारे में आवेशपूर्ण थे क्योंकि उनकी भाभी सती की रस्म में निधन हुई। उसके जीवन का एक आकर्षक पहलू था कि वे ईस्ट इंडिया कम्पनी में नौकरी करते थे और उसी समय मुग़ल बादशाह के राजदूत भी थे। वे पूरी दुनिया घूमते थे और सीखते थे ताकि नए विचार मिल सके भारत का सुधार करने के लिए। बृटेन का दौरा करते समय मैनिंजाइटिस से उनकी मृत्यु बरिस्टोल में हुई।
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