मेरे खयाल में, भारत की सब से बड़ी समस्या भ्रष्टाचार है। अगर भारतीय राजनेताओं बेहतर होते और देश के बारे में सोचते, फिर शायद प्रदूषण कम होता, गरीबी का समाधान मिलेगा, उत्पात खत्म होता और भारत कामयाब हो सकते। मगर भारतीय राजनेताओं ऐसे नही सोचते है - वे सिर्फ उनके पराक्रम और उनके बटुआ के बारे में सोचते हैं।
इस वक्त, इंडिया में चुनाव हो रहा है और संभाव्य है कि नरेंद्र मोदी नया प्रदान मंत्री बनेगा। २००२ में , उसके बोलने पर हजारों मुसलमान मारे गये - फिर भी , उससे सज़ा नहीं , प्रशंसा मिल रहा है। लोग उसको पसंद करते है क्योंकि वे कहते हैं कि जब वो गुजरात के मुख्य मंत्री था, अर्थव्यवस्था सुधार हुआ। लेकिन वह पैसा सिर्फ कई अमीर लोगों को गया - आम आदमी के जीवन में कुछ नही बदल गया। उसके ऊपर, क्या फर्क पड़ता है अगर अर्थव्यवस्था सुधार हुआ जब यह आदमी नरसंहार कर रहा है? भारत सारे धर्मों के लिए है - संविधान यह ही कहता है। हर आदमी, विशेषत: प्रदान मंत्री, इस बात को मानना चाहिए।
भ्रष्टाचार बड़ी समस्या है क्योंकि राजनेताओं वोट और पैसे चुराते हैं। वे पैसे सार्वजनिक धन से लेते है और अपने-आप के लिए इस्तेमाल करते हैं। और फिर, कुछ काम भी नही करने के बाद, वे गाँव वाले और गरीब लोग के नाम मतपत्र पर लिखते है ताकि वे जीत सकते हैं। ऐसे, वे बार - बार जीतते हैं मगर कुछ सरकारी काम नही करते है।
इस चुनाव में एक नयी राजनीतिक दल है - आम आदमी पार्टी। अरविन्द केजरीवाल, ए. ए. पी. का नेता, ईमानदार सरकार के बारे में बात करता है। वह चाहता है कि भारत का सरकार फिर से नेकनीयत बन जाइये जैसे था जब देश जवान था। वह भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहता है। मेरी इच्छा है कि अधिक राजनीतिज्ञों केजरीवाल के जैसे बात करे। फिर, भारत मजबूत और बढ़िया बन सकेगा।
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