आयेशा मेहरोत्रा की भूल
जब हम छोटे होते, हम बहुत सारी गलतियाँ करते हैं। उस उम्र में, हम जानते नहीं क्या - क्या मना है या ना । मगर हम ये अनुभव से सीखते है और भविष्य में अलग करते हैं।
दिसम्बर २००१ में मैं सात साल की थी। मेरे परिवार और अपनी माँ के फुफेरे भाई के परिवार गोआ गए थे। तब, मैं बॉम्बे में रहती थी मगर अपनी माँ के फुफेरे भाई के परिवार कनेक्टिकट में रहते थे। इस लिए , मैने उसको बहुत बार नहीं मिले थे। एक दिन, हम सब खाने गए। जब मैं सात थी, मैं अपने पिता से सब कुछ मंगवाती थी - कोई नये खिलौने खरीदने के लिए या जब मैं थकी थी, मुझे उठाने या हमेशा मेरे खाना ख़त्म करने। इस दिन ख़ास नहीं था। मुझे कुछ ना कुछ चाहिए था और मैं अपने पिता के लिए ढूंढ़ने गयी।
अचानक अपनी आँखे के समतल में मैंने एक बालों हाथ देखी। उसपर एक काली घड़ी थी और घड़ी पर चांद थी - यह अपने पिता जी की घड़ी ही थी ! थोड़ा ऊपर देखकर मैंने नीली और साफेद धब्बेदारी की कमीज़ देखी। मेरा पिता हमेशा ऐसी वाली कमीज़ पहनता था। उसका मनपसंद दुकान "फैब इंडिया " से था। मैं दौड़कर उस हाथ को पकड़ा लिया और खींचने लगा। मैं यह सब बिना सोचकर कर रही थी। इतने में, हाथ का मालिक ने नीचे मुझे देखा। “क्या हुआ, माशूक़?”
मगर अपने पिता की आवाज़ इतनी अजीब क्यों था? मैंने अपनी सिर को ऊपर की। हमारे आँखे मिले - वह अपना मामा था। तबी द्यान आई कि मेरी माँ कहती थी की उसके फुफेरे भाई और मेरे पिता को एक रूप के कपडे पसंद थे। मुझे मालुम नहीं था अब क्या करने तो मैं उसके हाथ छोड़कर वहाँ से चीखकर भाग गयी। सब लोग हसने लगे और मुझे मालूम हुआ कि बच्चे के तरह करने के पहले सोचो कि मैं किसके सामने हूँ।
तीन - चार महीने के बाद मेरा मामा की गाड़ी टक्कर गयी और वह मर गया। यद्यपि अपनी भूल शर्मनाक है, मैं मुस्कुराकर याद करती हूँ क्योंकि यह अपने मामा के साथ मेरे अंतिम और मनपसंद स्मृति है।