Tuesday, November 19, 2013

HW 19- सुप्रिया कि भूलें

सुप्रिया जळूकर ११/२०/१३
HW 18: क्या आपसे कभी कोई भूल हुई है? अगर हुई है तो क्यों और कैसे? अपने इस भूल से क्या सिखा।

सब लोंगों को कभी न कभी भूल हो जाती है. पिछले गर्मियों में, जब मैं भारत में थी, मैंने एक भूल की। एक शनिवार को मैं मेरी दादी जी के मिलने गई। घर आकर, मेरी दादी जी ने कहा कि हम कुछ देर में एक चाचा या चाची के शादी से जा रहे थे। मेरी फूफी भी आई थी, तो इस लिए, उसने मुझ को कहा कि फूफी को बुलाई। मेरी फूफी इस ही पड़ोस में रहती थी. जाने के पहले, दादी जी ने  मुझ को एक कमीज़ दिया। मुझ को कहा कि इस कमीज़ पर इस्तरी करना। इस कमीज़ फूफी की कमीज़ थी। मैं कमीज़ के नीचे एक सफ़ेद चादर डाली और इस्तरी भी शेल्फ से लाई।  इसके बाद, मैंने कमीज़ को इस्तरी करने में लग गई। 
तभी ही मुझे बहुत भूक लगी, और मैं सोची, एक-दो मिनुत में मैं वापस आउंगी काम ख़तम करने के लिए।  मैं रसोई में गई, कुछ चावल खाने के लिए।  लेकिन जाने के पहले मैंने इस्तरी मेज़ पर डालने के भूल गई थी! इस्तरी कमीज़ पर  रखती थी।  मैं खाना खाकर कमरें में वापस आई, तो देखकर मैं डर गई।  कमीज जल गई थी। मैं कमीज उठाकर देखा तो कमीज पर एक बड़ा गोल दाग था।  मैं सोची कि अगर दादी जी को पता लगा कि मैंने इस्तरी करने में फूफी की कमीज जलाती थी तो वह जरुर मुझ पर दोष लगाउंगी। इस लिए, मैंने चुप चाप कमीज अलमारी में डाली और फिर दूसरा कमीज लाई, फूफी को देने के लिए।  
कुछ देर में, मेरी दादी जी ने अलमारी में देखा उनको मेरी भूलें के बारे में मालुम हुआ। मुझे बहुत शर्म आई। लेकिन मेरी दादी जी बहुत ज्यादा नाराज नहीं थी।  उन्होंने ने कहा कि यह सिर्फ एक भूलें थी, और दोबारा और ध्यान से काम करना जरुरी है।  इस दिन मैं सीखी कि सब लोंगों को भूलें होते है, लेकिन इस भूलें से नई कुछ सीखना जरुरी है। 


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