Tuesday, November 19, 2013

My Mistake

मै हमेशा कोइ न कोइ भूल कार्ति हूँ। मैने कभी इतनी बादी गल्ति नही कि जो मुझे बहुत ज्यादा श्रम आई। मैन हमेशा गिर जति हून या कुच गिर दे ती हूँ। एक दिन मेरी मा कि चाचा के घर मे गए थे खाने के लिए। वहा बहुत लोग थे। मैन मदद कर्ने लागी थी। मैं करी के कटोरे हटा रही थी जब मैं गलती से कतोरी एक लड्की क बांह के उपर सरे गीरा दी. मुझे इतने श्रम आई, मेरे सरे चेहरे लाल हो गई। मैने बहुत बर माफी मांगी। लड्की नाराज़ नही थी लेकिन मुझे बहुत खराब लागि। मैं कमरे से भाग कर उपर वाले कमरे मैन चली गई। मैन रोने लग थे। मुझे समाज नही आई कि मै क्यों इतने रो रही थी। शायद क्यों कि मै अपने नानी को तकलीफ दिया या शर्मिंदा किया। लेकिन सब ने कहाँ कि कोइ बात नही है। येह सब हो ता रहता है। मेरी नानी ने कहाँ के वोह इतनी अच्ची ही नहीं है तोह मेरी नानी को कोइ तक्लीफ नहीं हुइ। हसने के बात येह है कि उस रात पर जब हम केक बात रहे थे तोह कोइ और उस लड्की पर केक गीरदिया। मुझे इस तरह के श्रम कभी नहीं महसूस किया। लेकिन जब मेरी नानी इस बात पर हासी तोह मुझे सकून मिली।

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